गुरुवार, 18 मार्च 2010

सब सही अपनी जगह हैं
सबका अपना न्याय है
चाह के सागर में सबकी
अपनी - अपनी नाव है

एक झोंका
स्वप्न टूटा
तुम न टूटे
तुम न झूठे
तो अमिट हो
कालजित हो

हर नज़र में
सच छुपा है
हर नज़र में
जिंदगी है
देख पायें हम उसे तो
ये हमारी रोशनी है ........
दरियादिली है ..........

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